गुरुवार, 20 मई 2010

सब मनुष्य देवता -तुल्य




कवि,

दार्शनिक

और तपस्वी के लिए

सब वस्तुएं पवित्र हैं,

सब घटनाएँ लाभदायक हैं,

सब दिन पवित्र हैं

और सब मनुष्य देवता -तुल्य


-एमर्सन


3 टिप्‍पणियां:

  1. सब मनुष्य देवता -तुल्य- तो मैं भी देवता तुल्य कहलाया! मेरी जय हो!!! :)

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  2. सुन्दर विचार!

    किन्तु जहाँ मनुष्य के भीतर देवत्व होता है वहीं अधमता भी होती है, इसीलिये तो मैथिलीशरण गुप्त जी ने "पंचवटी" में कहा हैः

    मैं मनुष्यता को सुरत्व की जननी भी कह सकता हूँ
    किन्तु मनुष्य को पशु कहना भी कभी नहीं सह सकता हूँ

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