तृष्णा इस कदर अन्धा बना देने वाली शक्ति है
कि दुनिया की तमाम दलीलें भी
आदमी को
यह विश्वास नहीं दिला सकतीं कि वह तृष्णावान है
- अज्ञात महापुरूष
इस दुर्जेय तृष्णा पर जो काबू पा लेता है,
उसके शोक इस प्रकार झड़ जाते हैं
जैसे कमल के पत्ते पर से जल के बिन्दू ।
-महात्मा बुद्ध

बहुत जल्द..................
एक ख़ुश खबर मिलने वाली है
बड़े ही हर्ष और गर्व से भरा प्रसंग है कि हमारे श्री मारवाड़ी ब्रह्मक्षत्रिय
समाज के वरिष्ठ एवं सम्मानित महानुभाव रानीवाड़ा निवासी श्रीमान
चुन्नीलाल जी कीरी एवं उनकी धर्म पत्नी सौभाग्यवती श्रीमती अमृती
देवी के सफलतम दाम्पत्य जीवन की स्वर्ण जयन्ती का महोत्सव
अत्यन्त धूमधाम और विराट स्तर पर मनाया गया जिसमे समाज के
अनेक जाने माने वरिष्ठजन समेत हज़ारों लोग अपनी शुभकामनाएं
देने हेतु सम्मिलित हुए ।
संयोग से मैं भी वहां उपस्थित था । जो मैंने देखा, वह अद्भुत था।
रानीवाड़ा के सुप्रसिद्ध हिंगलाज मन्दिर के सभा भवन में उस
दिन तिल रखने को भी जगह नहीं थी। जितने लोग अन्दर थे,
उतने ही बाहर भी..........सर्वश्री विजय ठाकुर, जेठमल छूंछा,
नारायणदास छूंछा जैसे कितने ही लोग यह देख कर अभिभूत
हो गए कि मंच पर श्रीमती अमृती देवी व श्री चुन्नीलाल जी
कीरी को विशेष रूप से बैठा कर उनके पूरे परिवार ने उनकी पूजा
अर्चना की तथा उपहार इत्यादि भेंट कर, अपनी कृतज्ञता अर्पित
करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। बेटे बेटी ही नहीं, बहुओं
और दामादों के अलावा पोते पोतियों और नाती नातिनों ने भी
इसमें भाग लिया ।
सूरत से विशेष रूप से आमन्त्रित ब्रह्मक्षत्रिय समाज के सुप्रसिद्ध
कलाकार दी ग्रेट इन्डियन लाफ्टर चैम्पियन अलबेला खत्री ने
अपनी ख़ास शैली में खूब हँसाया और हँसाने के साथ साथ कई
ऐसी बातें भी कीं जिनसे पूरा माहौल भावुक हो गया । आबू रोड से
पधारे जगदीश आचार्य और उनके कलाकारों ने खूब समां बाँधा ।
एक से बढ़ कर एक कलाकारी प्रस्तुत की गयी ।
इस सारे आयोजन में बेंगलोर से आये जगदीश चुन्नीलाल जी
कीरी के मार्ग दर्शन का विशेष महत्त्व था । उनकी प्लानिंग
शानदार रही । कार्यक्रम पश्चात सभी ने बहुत स्वादिष्ट भोजन
का भी आनंद लिया ।


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शाबास भूमिका काकू !
माँ हिंगलाज की कृपा से
ब्रह्मक्षत्रिय समाज की
एक कन्या
सुश्री भूमिका हेमंत कुमार काकू ने
कक्षा 7 में 93% अंक
प्राप्त कर कक्षा में दूसरे स्थान पर रह कर
परिवार एवं समाज
का नाम रौशन किया है ।
श्री मारवाड़ी ब्रह्मक्षत्रिय समाज डहेली विभाग की सुकन्या
कुमारी भूमिका के उज्ज्वल भविष्य के लिए
हार्दिक शुभ कामनाएं ।
एक तरफ जहां आज-कल बुज़ुर्गों की उपेक्षा करने व उनकी समुचित
सेवा -सुश्रुषा न करने के समाचार आये दिन देखते हैं, वहीँ अनेक
स्थानों पर उनके सम्मान और अभिनन्दन के महोत्सव मन को
राहत भी देते हैं ।
कल यानी 27 मई 2010 को श्री मारवाड़ी ब्रह्मक्षत्रिय समाज,
डहेली अपने स्वर्ण जयन्ती महोत्सव पर समाज के 16 ऐसे बुज़ुर्गों
को सार्वजनिक रूप से अभिनन्दित और सम्मानित कर रहा है
जिन्होंने अपने जीवन के 75 वसन्त पार कर लिए हैं ।
समाज के अध्यक्ष एवं मुख्य संयोजक वरिष्ठ समाजसेवी
श्री मनहर लाल काकू ने बताया कि इस अवसर पर आयोजित
सांस्कृतिक कार्यक्रम में "माँ बाप ने भुलशो नहीं" की प्रस्तुति भी
होगी। समारोह में सक्रिय समाजसेवी श्री खूब चन्द खत्री तथा
मंच संचालक कवि अलबेला खत्री को समाज गौरव सम्मान से
विभूषित किया जायेगा ।
मैं तो जा रहा हूँ कल डहेली .........अपना सम्मान जो करवाना
है........और फिर पूरे आयोजन का सञ्चालन भी करना है
धन्यवाद और बधाई मनहर लाल काकू जी ! ऐसे आयोजन करके
आप हमारी पुरातन परम्पराओं की ध्वजा फहरा रहे हैं
keep it up !


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महज किताबें पढ़ने का चटखारा लगा
कि ख़ुद की सार-असार विचार-शक्ति
कमज़ोर पड़ जाने का डर है;
और एक बार यह शक्ति नष्ट हुई
कि अपनी सारी ज़िन्दगी कौड़ी कीमत की हो जाती है
- स्वामी विवेकानन्द
कल जब मैं एक आलेख टाइप कर रहा था तो अचानक ब्लोगर ने
पहले तो लिप्यान्तर करना बन्द कर दिया फिर ख़ुद ही कहीं खो
गया, इस प्रकार वो पोस्ट नहीं हो सकी। सोचा, थोड़ी देर में ठीक हो
जाएगा, लेकिन मैं हतप्रभ रह गया जब कोई भी ब्लॉग मेरे यहाँ नहीं
खुला, ब्लोग्वानी या चिट्ठाजगत के ब्लॉग पढ़ ही नहीं पा रहा था।
जबकि जी के अवधिया ने बताया कि उनके यहाँ तो सब ठीक है। मैंने
बी एस पाबला जी से कहा तो उन्होंने तुरन्त मेरी मदद की और अपनी
तकनीकी क्षमताओं का प्रयोग करके जो हो सकता था, सब कर
दिया ..लगभग दो घंटे तक उन्होंने घर बैठे बैठे मेरे कंप्यूटर की
सफ़ाई की लेकिन जब ब्लोग्गर नहीं खुला तो उन्होंने खुलासा कर
दिया कि ये समस्या मेरे कम्प्यूटर की नहीं, नेट कनेक्शन की है ।
जो भी हो, पाबला जी ने जो तुरन्त सहायता की और मेहनत
की..मैं उसके लिए उनका मन से कृतज्ञ हूँ और साथ ही श्रद्धेय
अवधिया जी ने भी जो निर्देश मुझे दिए थे..उनके लिए भी मैं
उनका हार्दिक आभारी हूँ।
ये दुनिया ऐसे ही चलती है .........
कौन किसका हबीब होता है
कौन किसका रकीब होता है
बन जाता है वैसा ही तआल्लुक
जैसा जिसका नसीब होता है
आभार पाबला जी !
आभार अवधिया जी !